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राजसमंद मदारिया चौखला नीलगर रंगरेज समाज में शिक्षा की मशाल बने प्रिंसिपल ताज मोहम्मद, गीतांजलि इंस्टीट्यूट में दी प्रेरक सीख

News 11 राजस्थान   बंशी माली गोवलिया

राजसमंद मदारिया चौखला नीलगर रंगरेज समाज में शिक्षा की मशाल बने प्रिंसिपल ताज मोहम्मद, गीतांजलि इंस्टीट्यूट में दी प्रेरक सीख

रंगरेज समाज में शिक्षा के क्षेत्र में यदि किसी शख्सियत का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है तो वह हैं प्रिंसिपल ताज मोहम्मद रंगरेज। मूल रूप से आकोला निवासी एवं वर्तमान में फतेहनगर में कार्यरत प्रिंसिपल ताज मोहम्मद वर्षों से शिक्षा के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। गीतांजलि इंस्टीट्यूट में आयोजित मोटिवेशनल स्पीच के दौरान उन्होंने शिक्षा को समाज की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए युवाओं से इसे जीवन का आधार बनाने की अपील की।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि शिक्षा शेरनी के दूध के समान है, जो जितना ग्रहण करता है उतनी ही उसकी सोच और आत्मविश्वास मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति का रास्ता शिक्षा से होकर ही गुजरता है। शिक्षा न केवल व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाती है बल्कि पूरे समाज को कुरीतियों से बाहर निकालने की क्षमता रखती है।

उन्होंने प्रसिद्ध कहावत “पूत कपूत तो क्यों धन सांचे, पुत्र सपूत तो क्यों धन सांचे” के माध्यम से समझाया कि यदि संतान शिक्षित और संस्कारवान है तो उसे धन के सहारे की आवश्यकता नहीं होती, वह अपने ज्ञान से स्वयं आगे बढ़ जाती है। वहीं अशिक्षा के कारण समाज में दहेज, फिजूलखर्ची और अन्य सामाजिक बुराइयां पनपती हैं, जो समाज को पीछे धकेल देती हैं।

प्रिंसिपल ताज मोहम्मद ने कहा कि समाज सुधार की शुरुआत व्यक्ति स्वयं से करे। जब व्यक्ति खुद पर शासन करता है और अनुशासन अपनाता है, तो समाज अपने आप अनुशासित हो जाता है। उन्होंने सीकर जिले के सिंघानिया गांव का उदाहरण देते हुए बताया कि जब एक व्यक्ति ने बुराइयों को छोड़ने का संकल्प लिया तो उसके साथ पूरे गांव के युवाओं का कारवां जुड़ गया।

कार्यक्रम में निंबाड़ा निवासी शिक्षक शब्बीर मोहम्मद रंगरेज का भी उल्लेख किया गया, जिन्होंने करीब 30 वर्ष पूर्व अपनी शादी में दहेज के नाम पर केवल एक कुरान शरीफ और असतावा लेकर दहेज प्रथा के खिलाफ मजबूत संदेश दिया था। उनकी इस पहल को रंगरेज फाउंडेशन भीलवाड़ा द्वारा सम्मानित भी किया गया।

मीडिया प्रभारी मोहम्मद अशरफ रंगरेज मोखुंदा ने बताया कि

सीनियर सिटीजन ताज मोहम्मद रंगरेज सहित समाज के कई शिक्षित युवाओं ने चेहल्लुम न करने और अनावश्यक खर्चों से बचने का संकल्प लिया। उनके इस कदम से प्रेरणा लेकर समाज के युवाओं से अपील की गई कि वे दहेज प्रथा, चेहल्लुम और फिजूलखर्ची को बंद करने का निर्णय अपने परिवारों से शुरू करें, ताकि रंगरेज समाज शिक्षा, संस्कार और सामाजिक सुधार की राह पर मजबूती से आगे बढ़ सके।

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